रविवार, 21 जून 2009

मौत के बाद

कुरआन मजीद एक बड़ी सच्चाई की तरफ हमें आकर्षित करता है यदि वह इंसान की समझ मे आ जाये तो सारे संसार का वातावरण बदल जाये। वह सच्चाई यह है कि तुम मरने के बाद मेरी तरफ़ लौट जाओगे और इस संसार में जैसे भी कार्य करोगे वैसा बदला पाओगे। मरने के बाद तुम गल सड़ जाओगे और दोबारा पैदा नही किये जाओगे ऐसा नहीं है। न ही यह सत्य है कि मरने के बाद तुम्हारी आत्मा किसी योनि में प्रवेश कर जायेगी। यह दृष्टिकोण किसी मानवीये बुद्धि की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। पहली बात यह है कि आवागमण का यह दृष्टिकोण वेदों में उपलब्ध नहीं है। बाद के पुराणों में इसका उल्लेख है उस से ज्ञात होता है कि इंसान के शुक्राणुओं पर लिखे सन्तानों के गुण पिता से पुत्र ओर पुत्र से उसके पुत्र में जाते हैं। इस धारणा का आरम्भ इस तरह हुआ कि शैतान (राक्षस) ने धर्म के नाम पर लोगों को ऊँच नीच में बांध दिया। धर्म के नाम पर शुद्रों से सेवा लेने और उनकों नीच समझने वाले धर्म के ठेकेदारों से समाज के दबे कुचले लोगों ने जब यह सवाल किया कि जब हमारा पैदा करने वाला ईश्वर है उसने सब इंसानों को आँख, कान, नाम हर चीज में बराबर बनाया है तो आप लोगों ने अपने आप को बड़ा और हमें नीचा क्यांे बनाया। इसके लिए उन्होंने आवागमन का सहारा लेकर यह कह दिया कि तुम्हारे पिछले ज़न्म के कर्मो ने तुम्हें नीच बनाया है। इस धारणा के अन्तर्गत सारी आत्मायें दोबारा पैदा होती हैं। और अपने कर्मो के हिसाब से योनि बदलकर आती है। अधिक कुकर्म करने हैं। उनसे अधिक कुकर्म करने वाले वनस्पति की योनि में चले जाते हैं, और जिसके कर्म अच्छे होते है वह मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं।

आवागमन के तीन विरोधी तर्क (दलीलें)

इस क्रम मे सबसे बड़ी बात यह है कि सारे संसार के विद्वानों और शोध कार्य करने वाले साइंस दानों का कहना है कि इस धरती पर सबसे पहले वनस्पति जगत ने जन्म लिया। फिर जानवर पैदा हुए और उसके करोड़ों वर्ष बाद इन्सान का जन्म हुआ। अब जबकि इंसान अभी इस धरती पर पैदा ही नही हुए थे और किसी इन्सानी आत्मा ने अभी बुरे कर्म नहीं किए थे तो किन आत्माओं ने वनस्पति और जानवरों के शरीर में जन्म लिया?दूसरी बात यह है कि इस धारणा का मान लेने के बाद यह मानना पड़ेगा कि इस धरती पर प्राणियों की संख्या में लगातार कमी होती रहे। जो आत्मायें मोक्ष प्राप्त कर लेंगी। उनकी संख्या कम होती रहनी चाहिये। अब कि यह तथ्य हमारे सागने है कि इस विशाल धरती पर इन्सान जीव जन्तु और वनस्पति हर प्रकार के प्राणियों की जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। तीसरी बात यह है कि इस संसार में जन्म लेने वालों और मरने वालों की संख्या में ज़मीन आसमान का अन्तर दिखाई देता है। मरनेवाले मनुष्य की तुलना में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या कहीं अधिक है। कभी-कभी करोड़ो मच्छर पैदा हो जाते है जब कि मरने वाले उससे बहुत कम होते है। कहीं-कहीं कुछ बच्चों के बारे में यह मशहूर हो जाता है कि वह उस जगह को पहचान रहा है जहा वह रहता था, अपना पुराना, नाम बता देता है। और यह भी कि वह दोबारा जन्म ले रहा है। यह सब शैतान और भूत-प्रेत होते हैं जो बच्चों के सिर चढ़ कर बोलते है और इन्सानों के दीन ईमान को खराब करते हैं। सच्ची बात यह है कि यह सच्चाई मरने के बाद हर इन्सान के सामने आ जायेगी कि मनुष्य मरने के बाद अपने मालिक के पास जाता है, और इस संसार मे उसने जैसे कर्म किये है उनके हिसाब से सज़ा अथवा बदला पायेगा।

कर्मो का फल मिलेगा

वह सतकर्म करेगा भलाई और नेकी की राह पर चलेगा तो वह स्वर्ग में जायेगा। स्वर्ग जहाँ हर आराम की चीज़ है। और ऐसी-ऐसी सुखप्रद और आराम की चीज़ें है जिनकों इस संसार में न किसी आँख ने देखा, न किसी कान ने सुना, और न किसी दिल में उसका ख़्याल गुजारा। और सबसे बड़ी जन्नत (स्वर्ग) की उपलब्धि यह होगी कि स्वर्गवासी लोग वहॉ अपने मालिक के अपनी आँखों से दर्शन कर सकेंगे। जिसके बराबर विनोद कोई चीज नहीं होगी। इस प्रकार जो लोग कुकर्म (बुरे काम) करेंगे, पाप करके अपने मालिक की आज्ञा का उल्लंघन करेंगे, वह नरक मे डाले जायेगे, वह वहॉ आग में जलेंगे। वहॉ उन्हें हर पाप की सज़ा और दंड मिलेगा। और सब से बड़ी सजा यह होगी कि वह अपने मालिक के दर्शन से वंचित रह जाऐगे। और उन पर उनके मालिक का अत्यन्त क्रोध होगा।­