शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010

क़ुरआन एक चमत्कार है।

हर चीज़ की एक विशेषता होती है, क़ुरआन जो आज हमारे बीच पाया जाता है अन्य धार्मिक ग्रन्थों की तुलना में उसकी भी बहुत सारी विशेषताएं हैं आज हम उसकी एक विशेषता क़ुरआन एक चमत्कार है के विषय पर प्रकाश डालेंगे।
जब हम कहते हैं कि क़ुरआन एक चमत्कार है तो इस का अर्थ यह होता है कि क़ुरआन मुहम्मद सल्ल0 के लिए चमत्कार के रूप में अवतरित किया गया है।
ईश्वर ने मानव मार्गदर्शन हेतु हर देश और हर युग में संदेष्टाओं को भेजा तो उन्हें चमत्कारियाँ भी दी ताकि लोग उनके ईश-दुतत्व पर भलिभांति विश्वास कर लें। उदाहरण स्वरूपः
(1) एक संदेष्टा इब्राहीम अलै0 हैं जिनको दहकती हुई आग में डाल दिया गया परन्तु आग उनके लिए अल्लाह की अनुमति से शांन्तिपूर्ण रूप में ठंडी हो गई।
(2) हज़रत मूसा अलै0 लाठी फेंकते तो साँप का रूप धारण कर लेती और जब समुद्र में लाठी मारा तो समुद्र के दोनो ओर का पानी रूक कर मध्य से रास्ता बन गया।
(3) ईसा अलै0 ईश्वर की अनुमति से मृतकों को जीवित कर देते थे और पैदाइशी अंधे की आँखों पर हाथ फेर देते तो उसकी आँख में रोशनी आ जाती थी।
उसी प्रकार अल्लाह ने अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्ल0 को भी विभिन्न चमत्कारियाँ दीं जिन में एक महत्वपूर्ण चमत्कार कुरआन है जो अपने अवतरण-काल से ले कर आज तक सम्पूर्ण मानव जाति के लिए चुनौति है।

क़ुरआन का सब से महान चमत्कार यह है कि इसकी शैली मानव शैली से सर्वथा भिन्न है। वह अरब जिसमें क़ुरआन का अवतरण हुआ था अपने शुद्ध साहित्यिक रसासवादन के लिए अति प्रसिद्ध थे । उनको अपनी भाषा शैली पर बड़ा गर्व था। ऐसे लोगों को क़ुरआन ने चुनौति दीः

"यदि उस (क़रआन) के विषय में जो हम ने अपने बंदे (मुहम्मद ) पर उतारा है, तुम किसी संदेह में हो तो उस जैसी कोई सूरः ले आओ और अल्लाह से हट कर अपने सहायकों को बुला लो जिनके आ मौजूद होने पर तुम्हें विश्वास है, यदि तुम सच्चे हो।" (सूरः2 आयत 23-24)

लेकिन इतिहास साक्षी है कि पूरे अरब उसके समान एक अध्यय तो क्या एख श्लोक भी पेश करने में असमर्थ्य रहे, हालाँकि वह मुहम्मद सल्ल0 के विरोद्ध में पूरे साहसी बने थे और आपत्ति का कोई अवसर खोना नहीं चाहते थे। सब से बड़ी बात यह है कि वह अरबी भाषा के भी पूरे तौर पर माहिर थे, उनकी भाषा इतनी उच्च-कोटी की थी कि शायरी में बातें करते थे। आप स्वयं सोचिए कि यदि क़ुरआन मानव रचित होता तो कुछ लोग अवश्य इसके समान पेश कर सकते थे लेकिन न कर सके। यह ग्रन्थ आज तक संसार वालों के लिए चुनौति बना हुआ है तथा रहती दुनिया तक बना रहेगा।

बात बिल्कुल स्पष्ट है आप स्वयं विचार कर सकते हैं कि यदि किसी पुस्तक का लेखक यह दावा करे कि कोई माई का लाल मेरे जैसी शैली में नहीं लिख सकता और चैलेंज दे कि यदि पूरे संसार के इनसान भी मन-मस्तिष्क मिला कर मेरी पुस्तक के समान लिखना चाहें तो वह एख पृष्ठ तो दूर की बात है एक लाईन भी नहीं लिख सकते।

ऐसा दावा करने वाला मेरी समझ से मूर्ख ही होगा क्योंकि उससे अच्छा लिखने वाले हज़ारों व्यक्ति मिल जाएंगे। लेकिन क़ुरआन ने ऐसा ही चैलेंज आज से साढ़े चौदह सौ शताब्दी पूर्व दिया जिसको कुबूल करने से लोग असमर्थ्य रहे और आज तक हैं। हालाँकि क़ुरआन की भाषा को समझ लेना बहुत आसान है ।

उस समय से आज तक कितने देशों में अरबी के साहित्यकार गुज़रे हैं लेकिन किसी को इसके समान बना कर पेश करने का साहस न हो सका। और होता भी कैसे कि अल्लाह ने इसे रहती दुनिया के मार्गदर्शन हेतु चमत्कार के रूप में उतारा था । आज एख व्यक्ति मात्र इस विषय पर चिंतन मनन कर ले तो वह सरलतापूर्वक अपने ईश्वर की ओर से आए हुए संदेश को अपनाकर स्वर्ग का भागीदार बन सकता है।

आज की पोस्ट में इसी पर हम बस करते हैं कुरआन की अन्य विशेषताओं के साथ अगली पोस्ट में फिर मिलेंगे तब तक के लिए अनुमति दीजिए इस अनुरोध के साथ कि हमारी इन प्रेमवाणियों पर चितन मनन किया जाएगा। धन्यवाद

बुधवार, 27 अक्टूबर 2010

कुरआन क्या है ?


क़ुरआन ईश-वाणी अर्थात ईश्वर की वाणी है ( वह ईश्वर जो एक है, जिसको किसी की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिसके पास न माता पिता है न संतान, न उसका कोई भागीदार है)
उस ईश्वर ने मानव को अपनी सृष्टी के एक कोने धरती पर बसाया तो उसको जीवन बिताने के नियमों से भी अवगत किया वैसे ही जैसे कोई कम्पनी कोई सामान तैयार करती है तो उसके प्रयोग करने का नियम भी बताती है। अतः उसने मानव मार्गदर्शन हेतु हर युग और हर देश में मानव में से ही कुछ संदेष्टाओं को भेजा जिन में से अधिक संदेष्टाओं पर ग्रन्थ भी उतारा ताकि संदेष्टा उसके द्वारा मानव को अपने पैदा किए जाने के उद्धेश्य से अवगत करते रहें।
सब से अन्त में ईश्वर ने मानव के लिए अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्ल0 को "विश्व नायक" बनाकर भेजा और उन पर " क़ुरआन " अवतरित किया जो सम्पूर्ण मानव का मार्गदर्शक है।

क़ुरआन अरबी भाषा में "आकाशीय दूत" (ईश्वरीय आदेशों के पालन हेतु प्रकाश से पैदा की गई जाति जिनको "फरिशता" कहते हैं जो ईश्वर के अधीन होते हैं ) जिब्रील के माध्यम से अन्तिम ईश्दुत मुहम्मद सल्ल0 पर 23 वर्ष की लम्बी अवधि में थाड़ा थोड़ा करके अवतरित हुआ। न तो इसे मुहम्मद सल्ल0 ने लिखा है और न ही आपके किसी साथी का उसमें कोई हस्तक्षेप रहा है।
क़ुरआन जैसे जेसे अवतरित होता मुहम्मद सल्ल0 अपने अनुभवि लिपिक से अपनी निगरानी में लिपिबद्ध करवा लेते। फिर उसे सुनते और साथियों को संठस्थ करा देते। इस प्रकार क़ुरआन मुहम्मद सल्ल0 की मृत्यु से पूर्व ही पूर्ण रूप में संकलित हो गया तथा संकलन कर्म भी ईश्वर के आदेशानुसार हुआ। मुहम्मद सल्ल0 का उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं रहा।
क़ुरआन का यह सब से बड़ा गुण है कि इसके लेखन कोई इनसान नहीं बल्कि स्वयं अल्लाह की ओर से अवतरित हुआ है। अगली पोस्ट में हम बताएंगे कि अन्य धार्मिक ग्रन्थों की तुलना में क़ुरआन की विशेषताएं क्या हैं। तब तक के लिए अनुमति दीजिए, धन्यवाद।

रविवार, 24 अक्टूबर 2010

कुरआन सब के लिए


आज अधिकांश लोगों में जहाँ यह भ्रम प्रचलित है कि पवित्र क़ुरआन मुसलमानों का कोई धार्मिक ग्रन्थ है वहीं कुछ सज्जन यह भी मानते हैं कि क़ुरआन के लेखन मुहम्मद सल्ल0 हैं। यदि यही तथ्य होता तो चिंता की बात न थी हालाँकि यह वास्तविकता के बिल्कुल विरोद्ध है, न तो क़ुरआन के लेखक मुहम्मद सल्ल0 हैं और न ही यह मात्र मुसलमानों का ग्रन्थ है अपितु यह सम्पूर्ण संसार के स्वामी की ओर से सम्पूर्ण मानव-जाति को प्रदान किया गया एक महान उपहार है।

इसका सम्बोधन अरबों के लिए भी है, गैर-अरबों के लिए भी है। कालों के लिए भी है गोरों के लिए भी है। अमेरिकियों के लिए भी है फारसियों के लिए भी है। धनवानों के लिए भी है निर्धनों के लिए भी है। तात्पर्य यह कि क़ुरआन किसी विशेष जाति अथवा क्षेत्र के लिए नहीं अपितु पूरी दुनिया के लिए अवतरित हुआ है।


क़ुरआन "ऐ क़ुरैश" या "ऐ अरब वासियो" कह कर नहीं बल्कि "ऐ इनसानों" "ऐ मानवो" कह कर अपना आह्वान लोगों के सामने प्रस्तुत करता है। कुरआन कहता हैः

"बहुत बरकत वाला है वह जिसने यह फ़ुरक़ान (क़ुरआन) अपने बन्दे पर अवतरित किया ताकि सम्पूर्ण संसार के लिए सावधान कर देने वाला हो"। (सूरः 25 आयत 1)


और मुहम्मद सल्ल0 के सम्बन्ध में क़ुरआन कहता हैः

"हमने तुमको सभी इनसानों के लिए शुभसूचना सुनाने वाला और सचेत करने वाला बना कर भेजा।" (सूरः34 आयत 28)


परन्तु बड़े खेद की बात है कि अज्ञानता के कारण इसके सम्बन्ध में विभिन्न प्रकार के संदेह फैलाए गए, फलस्वरूप आज सबने इसे मुसलमानों का कोई धार्मिक ग्रन्थ समझ लिया है।

शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

विचार करें !!!

आज मैं क़ुरआन की एक सूरः पर चिंतन मनन कर रहा था जिसमें ईश्वर का पाँच शब्दों में परिचय कराया गया है। कुछ लोगों ने अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्ल0 से प्रश्न किया कि ईश्वर का परिचय कराएं तो अल्लाह ने स्वयं यह सूरः अवतरित कर दी। सोचा क्यों न अपने पाठकों को भी इस से अवगत कराएं क्योंकि मानव का ईश्वर तो एक ही है ना... और जो ईश्वर संसार का सृष्टीकर्ता एवं पालनकर्ता है उसके गुणों से अवगत होना हर इनसान का कर्तव्य होना चाहिए.. तो आइए और हमारे साथ चिंतन मनन कीजिए इन गुणों परः

सूरः अल इख्लास ( सूरः न112)

(1) वह अल्लाह एक है।
(2) उसको किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं पड़ती।
(3) उसके पास माता पिता नहीं।
(4) उसके पास संतान नहीं।
(5) उसका कोई भागीदार नहीं।

ईश्वर के यह गुण मात्र क़ुरआन ने बयान नहीं किए अपितु अन्य धार्मिक ग्रन्थों ने भी ईश्वर के ऐसे ही गुणों का वर्णन किया है। मुझे क्षमा कीजिएगा क्या आज हमारे समाज में जिनकी पूजा की जा रही है उन में यह पांच गुण पाए जाते हैं ? यह एक विचारनीय विषय है। जी हाँ! आज ईश्वर का नाम तो सब लेते हैं परन्तु उसे पहचानते बहुत कम लोग हैं। अब आप स्वयं सोचें कि बिना पहचान के ईश्वर की पूजा से क्या लाभ ? यदि आप पहचानते हैं ईश्वर को, तो तुलना कीजिए ईश्वर के इन पांच गुणों और पूज्यों के बीच , जिन की आज पूजा की जा रही है। अथवा बताइए हमें इसका कारण ताकि ज्ञान का आदान प्रदान हो सके। धन्यवाद