मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

एक पुजारी का किस्सा

एक व्यक्ति के तीन बेटों ने मुर्ति-पूजा छोड़ कर एक ईश्वर की पूजा शुरू कर दी थी। पिती मुर्तियों का बहुत बड़ा पुजारी था। अपने घर के मंदिर में सुबह शाम मुर्ति की पूजा करता था। इसी लिए वह हर समय भयभित रहता कि ऐसा न हो कि हमारे घर पर भगवाग की शराप पड़ जाए। एक दिन वह भगवान के पास गया और भगवान को इन शब्दों में सम्बोधित कियाः देवता जीः आप जानते हैं कि हमारे समाज में एक व्यक्ति आ गया है जो लोगों को अपने पूर्वजों के धर्म से काट कर एक अलग धर्म की ओर बुला रहा है, वह आपका सब से बड़ा विरोद्धी है... हमें इस सम्बन्ध में कुछ परामर्श दीजिए कि क्या किया जाए उसके साथ। मुर्ति में जीव कहाँ कि उत्तर दे...पुजारी थोड़ी देर प्रतीक्षा किया...फिर कहने लगा कि शायद आप हम से क्रोधित हैं, ठीक है...आपका क्रोध ठंडा होने तक हम आपको कुछ न कहेंगें। उसी रात पुजारी के बेटों ने रात में घर के मंदिर से मुर्ति को अपने कंधों पर उठाया और गंदगी के ठेर और सड़े हुए मुर्दार कुवें में फेंक दिया। सुबह सवेरे जब स्नान करके घर के मंदिर में पूजा पाट के लिए गए तो मुर्ति को गुम पा कर ज़ोर से चींख मारी। किस कमीने ने हमारे देवता की चोरी की है...परिवार के लोग चुप रहे। फिर वह परेशानी की हालत में खोजते हुए बाहर निकले तो मुर्ति को देखा कि उल्टे मुंह कुवें में गिरा पड़ा है। तुरन्त वहाँ से निकाला, उसे धुला और खुशबू लगा कर फिर उसी स्थान पर रख दिया। दूसरी रात उनके बेटों ने फिर वैसा ही किया और उसे कुवें के पास गंदगी में फेंक दिया। सुबह जब पूजा के लिए घर के मंदिर में गए तो मुर्ति को न पा कर सख्त क्रोधित हुए। फिर जब खोजते हुए कुवें के पास पहुंचे तो पहले ही दिन के जैसे गंदगी में उल्टे मुंह गिरा देखा। प्रेम से उठाया और धुल कर, खुशबू लगाकर मंदिर में रख दिया।
उसके बेटे हर रात ऐसा ही करने लगे। जब मआमला हद से आगे बढ़ गया तो पुजारी एक दिन रात में सोने से पहले उसके पास गया और कहाः ऐ देवता! खेद है तुम पर, बकरी का बच्चा भी अपनी पीठ पर होने वाले आक्रमण को रोकता है, फिर उस बुत की गर्दन में एक तलवार लटका दी और कहाः इस तलवार के द्वारा अपने शत्रु से अपनी सुरक्षा करना। जब रात का अंधेरा छा गया तो उसके बेटों ने बुत को उठाया, उसकी गर्दन में एक मुर्दार कुत्ता बाँधा और उसी गंदे कुवें में फेंक आए। जब सुबह हुई और पुजारी बुत को खोजते हुए कुवें के पास पहुंचे तो उसकी दयनिय स्थिति देख कर कहाः
ورب يبول الثعلبان برأسه    لقد ذل من بالت عليه الثعالب
ऐसा देवता कि जिसके सर पर लोमड़ी पेशाब करे... वह कितना अपमानित और विवश है...जिस के सर पर लोमड़ियाँ पेशाब करती हों।
यह कह कर तुरन्त मुसलमान हो गए और अपने बेटों के साथ एक अल्लाह की पूजा में लग गए। इतिहास में इस पुजारी का नाम "अमर बिन जमूह" है। 

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

जनसेवा

मानव की सेवाः एक दिन मुहम्मद सल्ल0 ने अपने साथियों से फरमायाः अल्लाह की क़सम वह व्यक्ति मोमिन नहीं है। अल्लाह की क़सम वह कभी मुमिन कहलाने के योग्य नहीं। अल्लाह की क़सम ऐसे व्यक्ति का ईमान सही नहीं। साथी आश्चर्यचकि और प्रश्न करने पर विवश कि आखिर वह कौन दुर्भाग्य व्यक्ति होगा जिसके मोमिन न होने की गवाही अल्लाह के रसूल सल्ल0 तीन तीन बार क़सम खा कर दे रहे हैं: उत्तर में आप सल्ल0 ने फरमायाः वही जिसके पड़ोसी उसके कष्टों से सुरक्षित नहीं रह पाते हैं। ( बुखारी,मुस्लिम)
ज्ञात होना चाहिए कि पड़ोसी मात्र वही नहीं है जिसका घर आपके घर से लगा हुआ हो अथवा आमने सामने हो अपितु पड़ोसी दुकान में भी होता है, कम्पनी और बस, ट्रेन में भी होता है। उन सब की भावनाओं का ख्याल रखना आवश्यक है वरना मुहम्मद सल्ल0 को तीन तीन बार क़सम खा कर घोषणा करने की आवश्यकता ही क्या थी। दूसरी बात यह है कि इस प्रवचन में पड़ोसी कहा गया है जो हिन्दु, ईसाई, यहूदी कोई भी हो सकता है सब के साथ में दया और प्रेम का व्यवहार करना ज़रूरी है।
एक हदीसे क़ुद्सी में अल्लाह इनसानों से पूछेगाः मैं भुखा था तुने मुझे खिलाया क्यों नहीं, मैं प्यासा था, मैं बे-लेबास था, मैं बीमार था। इनसान आश्चर्य से पूछेगाः हे अल्लाह ! सारी सृष्टि को खिलाने, पिलाने, पहनाने और स्वास्थ्य देने वाला तू है, तू कैसे भूखा, प्यासा और बीमार हो सकता है ? फरमाएगाः "मेरा फलाँ बन्दा ऐसा था, यदि तू उसकी आवश्यकता पूरी करता तो तू मुझे वहाँ पाता।" ( मुस्लिम)
इस्लामी शिक्षाओं में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की रिआयत की गई हैं कि हमारी किसी बात से अथवा कार्य से किसी का दिल न टूटे और वह मिथ्या संदेह में न पड़े। इसी लिए मुहम्मद सल्ल0 ने फरमाया कि यदि कहीं पर तीन व्यक्ति हों तो दो व्यक्ति परस्पर हल्के से बातें न करे क्यों कि तीसरे आदमी के दिल में यह गुमान गुज़र सकता है कि शायद मेरे ही सम्बन्ध में बातें हो रही हैं।   
निर्जीव की सेवाः ज़माने को बुरा भला कहने से रोक दिया गया। पानी के महत्त्व को बतलाकर समुद्र में भी अधिक पानी के प्रयोग से मना किया गया। ज़मीन की सेवा यह बताई गई कि इस पर विनम्रता के साथ चला जाए और अकड़ कर सीना तान कर चलने से रोक दिया गया।
वनस्पति की सेवाः इस्लाम ने छायादार वृक्ष की सुरक्षा पर बड़ा बल दिया। उसकी क्षाया में गंदगी फैलाने और पेशाब पाखाने के लिए प्रयोग करने को लानत ठहराया। (मुस्लिम)
जब चीन ने एक व्यक्ति एक वृक्ष का नियम लागू किया तो लोगों ने इसे सराहनिय भुमिका सिद्ध किया जब कि आज से साढ़े चौदह सौ वर्ष पर्व मुहम्मद सल्ल0 ने फरमाया था कि "यदि क़यामत का समय आ जाए और तुम में से किसी के हाथ में खजूर के पौधे हों और वह महा-प्रलय के बरपा होने से पहले पौधे को लगा सकता हो तो लगा दे क्योंकि उसे इसके बदले पुण्य मिलेगा।" (सही जामिअ़ हदीस संख्या 1424).
पशु-पक्षियों की सेवाः इस्लाम ने बिना किसी उद्देश्य के पशु-पक्षियों को निशाना बनाने से मना किया।( मुस्लिम) जानवरों को भूका प्यासा रखना और उनसे उनकी ताक़त से बढ़ कर काम लेना अपराध ठहराया गया। मुहम्मद सल्ल0 के प्रवचनों में आता है कि एक इबादतगुज़ार महिला ने बिल्ली को बाँध कर रख दिया. और उसे खाने पिने के लिए आज़ाद नहीं किया और न अपनी ओर से उसके खाने पीने का व्यवस्था किया इस अत्याचार के कारण वह नरक में गई। जबकि एक वैश्या के सम्बन्ध में मुहम्मद स्ल्ल0 ने फरमाया कि उसने एक कुत्ते को देखा जो प्यास के कारए ऐसे हाँप रहा था कि मर ही जाएगा, उसने अपना मोज़ा निकाला और उसे अपनी ओढ़नी से बाँधा, कुंवें से पानी निकाल कर कुत्ते को पिलाया, उसके इस पुनय के कारण उसे क्षमा कर दिया गया।