शुक्रवार, 9 मार्च 2012

सुनिए! आपका बच्चा आपसे क्या चाहता है?

(उर्दू पुस्तक से लिया गया)

आप माता पिता बड़े "वह" हैं. छोटी गलतियों पर मुझे मारते पीटते रहते हैं बुरा भला कहते हैं दूसरों का गुस्सा भी मुझ पर निकालते हैं.ऐसा करते हुए आप भूल जाते हैं कि आप भी कभी बच्चे थे. मेरी इच्छा है कि आप अपने आप में परिवर्तन पैदा करें अपने क्रोध और भावनात्मक तरीके पर  नियंत्रण  रखें. क्योंकि मुझे आपकी मदद, दोस्ती, प्यार और मार्गदर्शन की जरूरत है. आई एक दूसरे को समझने की कोशिश करते हैं ताकि हंसते मुस्कुराते और एक दूसरे को समझते हुए जिंदगी गुजा़री जा सके.

आपका बेटा / बेटी

1. जब कोई अच्छा काम करूँ तो मुझे शाबाश ज़रूर दें. इससे मेरी हिम्मत बढ़ती हैं और खुशी का अहसास होता है.

2. मुझमें ऐसी महारतें पैदा करें जो जिंदगी भर  मेरे साथ रहें.

3. अपने वादे के पूरा करें क्योंकि जब आप किसी अच्छे काम पर मुझे पुरस्कार देने का वादा करते हैं, लेकिन नहीं देते तो मेरी नज़रों में आपका वह सम्मान नहीं रहता जो रहना चाहिए था।

4. जब कोई गलती हो जाए तो मेरे साथ प्लीज़ चींख चिल्ला कर बात न करें. आपको लाल पीला देख कर मैं अपने आप को भयभीत और बिखरा बिखरा सा महसूस करता / करती हूँ.

5. मेरी वर्तमान गलती के साथ पिछली गलतियों की सूची न दुहरायें बड़ों से भी गलतियां होती हैं. जबकि में तो अभी बच्चा हूँ.

6. मुझे निकम्मा, मूर्ख और गदहा कहकर न पुकारें. क्या आपके शब्दकोश में मेरे लिए अच्छे शब्द नहीं.

7. कभी कभी मेरे दोस्तों / सहेलियों को आयोजन के साथ खाने पर बुलाएँ हमारे इकट्ठे खाना खाने से मुझे प्रेम और भाईचारे का पाठ मिलता है.

8. यदि संभव हो तो कम से कम एक समय का खाना मेरे साथ जरूर खाएं.

9. मुझे अपने रिश्तेदारों के बारे में जानकारी दें और समय समय पर उनसे मुलाकात भी कराएं। 

10. आप बड़े हैं और मैं छोटा. इसलिए मेरी गलतियों को क्षमा कर के अपने बड़ा होने का सबूत दें और अच्छी तरह से मेरी सुधार करें. ( शेष अगले पोस्ट में)

रविवार, 4 मार्च 2012

इस्लाम सद्व्यवहार और ‘शांति का धर्म हैं।

जब अफगानिस्तान पर कब्जा करने के लिए अमेरिका तालिबान के खिलाफ एकतरफा तौर पर शस्त्र हिंसक और अमानवीय कार्यवाही लिप्त था, उसी दौरान तालिबान ने ब्रिटिश पत्रकार यओन्नी रिडले को गिरफ्तार कर लिया था। वे तालिबान के सैनिकों के बर्ताव एवं आचार-विचार से बहुत प्रभावित हुई और तालिबान द्वारा उन्हें रिहा करने के बाद उनमें इस्लाम को सीख‌ने-समझने की सहज अभिरूचि पैदा हुई । आखिरत गहन अध्ययन और चिन्तन के उपरान्त उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर दिया।

वे कहती हैं कि ईसराइल धर्म में कोई आकर्श्र्ण नहीं हैं। ब्रिटेन की वारविक यूनीवर्सिटी में १३ जनवरी २००३ को एक साधारण से कार्यक्रम में अपने इस्लाम धर्म में जाने का एलान करते हुए उन्होने कहा कि:
’’तालिबान के व्यवहार से ही मैं इस्लाम धर्म के अध्ययन की ओर उन्मुख हुई। इस्लाम सद्व्यवहार और ‘शांति का धर्म हैं।