शनिवार, 24 अप्रैल 2010

संदेहों का निवारण (3)

संदेहः (1) मुसलमानों में बच्चों को यही बुनियादी तालीम दी जाती है कि दुनिया में इस्लाम ही एक मात्र मज़हब है जो अल्लाह का है और अल्लाह ने ही शुरू किया है, जबकि दूसरे धर्म मनुष्य ने शुरू किए हैं...

उत्तरः बहन जी! यह बिल्कुल सही है कि मुसलमान अपने बच्चों को इस्लाम की शिक्षा शुरू से ही देते हैं, उनको अल्लाह का ज्ञान भी दिया जाता है और यह  भी बताया जाता है कि ईश्वर ने मानव को बनाया और धर्ती पर बसाया तो उन्हें यूं ही नहीं छोड़ दिया कि जैसे चाहें जीवन बिताएं बल्कि जिस प्रकार एक कम्पनी कोई सामान तैयार करती है तो उसके प्रयोग करने का नियम भी बताती है उसी प्रकार ईश्वर ने मानव को जीवन बिताने का नियम भी दिया। यह नियम एक ही हो सकता है क्यों कि मानव की उत्पत्ति एक ही माता पिता से हुई, उत्पत्ति का नियम भी एक ही है, हर एक की उत्पत्ति एक प्रकार की धातु से होती आ रही है, और उत्पत्ति करने वाला भी मात्र एक ईश्वर (अल्लाह) है। चार प्रकार की यह समानताएं इस बात का पता देती हैं कि मानव का धर्म भी एक ही होना चाहिए। न कि अलग अलग। अब प्रश्न यह है कि धरती पर विभिन्न धर्म कैसे पैदा हुए तो इसके लिए आगे पढ़िए।

संदेह (2) अल्लाह सर्वशक्तिमान है, जबकि दूसरे धर्मों के देवी-देवता 'शैतान' हैं...यानी अल्लाह के विरोधी हैं...

उत्तरः मुसलमानों के हाँ अल्लाह की कल्पना किसी विशेष जाति तथा वंश तक सीमित नही है बल्कि वह विश्व का सृष्टीकर्ता, स्वामी और पालनकर्ता है। वह अल्लाह एक है, उसके पास माता पिता नहीं, उसके पास सन्तान नहीं, उसको किसी प्रकार की आवश्यकता नहीं पड़ती, वह मानव रूप धारण नहीं करता। उसका कोई भागीदार नहीं। यह शिक्षा मात्र इस्लाम की नहीं अपितु सारे धार्मिक ग्रन्थों की है। और यह बात नोट कर लें कि एक मुसलमान दूसरे धर्मों के देवी देवताओं के लिए अपशब्द का प्रयोग नहीं करता परन्तु यह अवश्य कहता है कि यह देवी देवता जिनकी पूजा की जा रही है उनको पूजने की शिक्षा स्वयं उन्हों ने नहीं दी थी और न आज उनके धार्मिक ग्रन्थ दे रहे हैं देखिएऋवेद 4 / 12 /1 दुवैरा सत्यि बहिर्षि सैकड़ों देवी देवताओं का बहिष्कार करो। और अर्थवेद 9/ 40 मैं आया है " जो लोग झूठे अस्तित्व वाले देवी देवताओं की पूजा करते हैं वे अंधा कर देने वाले गहरे अंधकार में डूब जाते हैं। वह एक ही अच्छी पूजा करने योग्य है। "

संदेह (3) ऐसे में भला कौन अपने अल्लाह के विरोधियों को अच्छा समझेगा...??? उनके देवी-देवताओं के बारे में ग़लत बातें की जाती हैं... इसलिए लोगों की ऐसी मानसकिता बन जाती है कि वो ख़ुद को सर्वश्रेष्ठ और दूसरे धर्मों को तुच्छ समझते हैं...
उत्तरः जैसा कि हमने ऊपर ही बता दिया है कि इस्लाम वही कहता है जो अन्य धर्मों के धर्मिक ग्रन्थ कहते हैं। इसलिए आज एक मुस्लिम यह समझता है कि हमारे उन भाईयों को पता नहीं है जिसके कारण वह देवी देवताओं की पूजा कर रहे हैं। इस लिए वह प्रेम से, स्नेह से, मुहब्बत से उनके सामने अनके अपने ईश्वर का परिचय कराता है लेकिन वह अन्य धर्म के मानने वालों को बुरा नहीं समझता, न उनके देवी देवताओं के सम्बन्ध में ग़लत बातें कहता है...और कहे भी क्यों जब कि क़ुरआन ने रोक दिया.. देखिए सूरः अनआम 108
" जो लोग अल्लाह के अतिरिक्त अन्य की पूजा करते हैं उनकों बुरा भला मत कहो, कि वह अज्ञानता के कारण अल्लाह को बुरा भला कहेंगे।"
 देखा ! इस्लाम हमें यही सिखाता है कि हम उनके पूज्यों के सम्बन्ध में ग़लत बातें न करें परन्तु हम उनकी पूजा करने नहीं जा सकते क्योंकि हमें सत्य और असत्य का ज्ञान है। फिर भी हम इस्लाम के अतिरिक्त अन्य धर्मों के मानने वालों के साथ भाई का समान व्यवहार करते हैं औऱ पारस्परिक सम्बन्ध में उनको वह सारा अधिकार देते हैं जो एक मुस्लिम को प्राप्त है। क्योंकि क़ुरआन ने हमें यही शिक्षा दी है देखिए ]60:8]
अल्लाह तुम्हें इससे नहीं रोकता है कि तुम उन लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करो और उनके साथ न्याय करो, जिन्होंने तुमसे धर्म के मामले में युद्ध नहीं किया और ना तुम्हे तुम्हारे अपने घर से निकाला. निस्संदेह अल्लाह न्याय करने वालों को पसंद करता है।

संदेहः (4) हम एक साल तक मदरसे में पढ़े हैं, यानि तीसरी जमात... हमें भी यह सब पढ़ाया गया है...हमने अप्पी (मुल्लानी जी को अप्पी कहते थे) से पूछा- जब हमारा अल्लाह ही सर्वश्रेष्ठ है तो फिर...क्यों हिन्दुओं की मुरादें पूरी होती हैं...???

उत्तरः जी हाँ ! अल्लाह से ही माँगना चाहिए और अल्लाह के अतिरिक्त कियी अन्य से माँगना महापाप है बल्कि इस्लाम में सब से बड़ा पाप यही हैं। यदि कोई अल्लाह के अतिरिक्त अन्य से माँगता है तो उसकी प्रार्थना भी स्वीकार नहीं होती बस उसके दिल में उसके प्रति आस्था बैठ जाती है हालाँकि देने वाला तो ऊपर वाला अल्लाह होता है वह अपनी असीम दया से प्रदान करता है कुरआन में कहा गयाः (देखिए सूरः अहक़ाफ 5 ) "और उस से बढ़ कर ज़्यादा गुमराह कौन होगा जो अल्लाह के अतिरिक्त ऐसों को पुकारता है जो क़यामत तक उसकी प्रार्थना न क़ुबूल कर सकें बल्कि उनके पुकारने से केवल ग़ाफिल हों "  ( शेष अगले  पोस्ट पर)

4 टिप्‍पणियां:

सलीम ख़ान ने कहा…

जो लोग अल्लाह के अतिरिक्त अन्य की पूजा करते हैं उनकों बुरा भला मत कहो, कि वह अज्ञानता के कारण अल्लाह को बुरा भला कहेंगे।

सलीम ख़ान ने कहा…

जो लोग अल्लाह के अतिरिक्त अन्य की पूजा करते हैं उनकों बुरा भला मत कहो, कि वह अज्ञानता के कारण अल्लाह को बुरा भला कहेंगे

safat alam taimi ने कहा…

जी सलीम भाई! इस्लाम हमें यही शिक्षा देता है। कि

जो लोग अल्लाह के अतिरिक्त अन्य की पूजा करते हैं उनकों बुरा भला मत कहो, कि वह अज्ञानता के कारण अल्लाह को बुरा भला कहेंगे।

Press Club of Kairana ने कहा…

aap ka blog dekha bohat achcha lag behen firdos ai mutaliq jo jwab aap ne dia he woh bohat lajavab he
mujhe yeh dekh kar bara afsoos huaa ko firdos hamari anjuman bloog privar se vabasta hen
azmat khan