सोमवार, 30 मई 2011

हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों में मुहम्मद तथा अहमद का उल्लेख

आज के इस पोस्ट में हम आपकी सेवा में कुछ ऐसे प्रमाण पेश कर रहे हैं जिन से सिद्ध होता है कि "कल्कि अवतार" अथवा "नराशंस" जिनके सम्बन्ध में हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों ने भविष्यवाणी की है वह मुहम्मद सल्ल0 ही हैं। क्योंकि कुछ स्थानों पर स्पष्ट रूप में "मुहम्मद" और "अहमद" का वर्णन भी आया है।

देखिए भविष्य पुराण ( 323:5:8)

" एक दूसरे देश में एक आचार्य अपने मित्रों के साथ आएगा उनका नाम महामद होगा। वे रेगिस्तानी क्षेत्र में आएगा।"

श्रीमदभग्वत पुराण : उसी प्रकार श्रीमदभग्वत पुराण (72-2) में शब्द "मुहम्मद" इस प्रकार आया है:

अज्ञान हेतु कृतमोहमदान्धकार नाशं विधायं हित हो दयते विवेक

"मुहम्मद के द्वारा अंधकार दूर होगा और ज्ञान तथा आध्यात्मिकता का प्रचनल होगा।"

यजुर्वेद (18-31) में है:

वेदाहमेत पुरुष महान्तमादित्तयवर्ण तमसः प्रस्तावयनाय

" वेद अहमद महान व्यक्ति हैं, यूर्य के समान अंधेरे को समाप्त करने वाले, उन्हीं को जान कर प्रलोक में सफल हुआ जा सकता है। उसके अतिरिक्त सफलता तक पहंचने रा कोई दूसरा मार्ग नहीं।"

इति अल्लोपनिषद में अल्लाह और मुहम्मद का वर्णन:

आदल्ला बूक मेककम्। अल्लबूक निखादकम् ।। 4 ।।अलो यज्ञेन हुत हुत्वा अल्ला सूय्र्य चन्द्र सर्वनक्षत्राः ।। 5 ।।अल्लो ऋषीणां सर्व दिव्यां इन्द्राय पूर्व माया परमन्तरिक्षा ।। 6 ।।अल्लः पृथिव्या अन्तरिक्ष्ज्ञं विश्वरूपम् ।। 7 ।।इल्लांकबर इल्लांकबर इल्लां इल्लल्लेति इल्लल्लाः ।। 8 ।।ओम् अल्ला इल्लल्ला अनादि स्वरूपाय अथर्वण श्यामा हुद्दी जनान पशून सिद्धांतजलवरान् अदृष्टं कुरु कुरु फट ।। 9 ।।असुरसंहारिणी हृं द्दीं अल्लो रसूल महमदरकबरस्य अल्लो अल्लाम्इल्लल्लेति इल्लल्ला ।। 10 ।।इति अल्लोपनिषद

अर्थात् ‘‘अल्लाह ने सब ऋषि भेजे और चंद्रमा, सूर्य एवं तारों को पैदा किया। उसी ने सारे ऋषि भेजे और आकाश को पैदा किया। अल्लाह ने ब्रह्माण्ड (ज़मीन और आकाश) को बनाया। अल्लाह श्रेष्ठ है, उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। वह सारे विश्व का पालनहार है। वह तमाम बुराइयों और मुसीबतों को दूर करने वाला है। मुहम्मद अल्लाह के रसूल (संदेष्टा) हैं, जो इस संसार का पालनहार है। अतः घोषणा करो कि अल्लाह एक है और उसके सिवा कोई पूज्य नहीं।’’

इस श्लोक का वर्णन करने के पश्चात डा0 एम. श्रीवास्‍तव अपनी पुस्तक "हज़रत मुहम्‍मद (सल्ल.) और भारतीय धर्मग्रन्‍थ" मे लिखते हैं:

(बहुत थोड़े से विद्वान, जिनका संबंध विशेष रूप से आर्यसमाज से बताया जाता है, अल्लोपनिषद् की गणना उपनिषदों में नहीं करते और इस प्रकार इसका इनकार करते हैं, हालांकि उनके तर्कों में दम नहीं है। इस कारण से भी हिन्दू धर्म के अधिकतर विद्वान और मनीषी अपवादियों के आग्रह पर ध्यान नहीं देते। गीता प्रेस (गोरखपुर) का नाम हिन्दू धर्म के प्रमाणिक प्रकाशन केंद्र के रूप में अग्रगण्य है। यहां से प्रकाशित ‘‘कल्याण’’ (हिन्दी पत्रिका) के अंक अत्यंत प्रामाणिक माने जाते हैं। इसकी विशेष प्रस्तुति ‘‘उपनिषद अंक’’ में 220 उपनिषदों की सूची दी गई है, जिसमें अल्लोपनिषद् का उल्लेख 15वें नंबर पर किया गया है। 14वें नंबर पर अमत बिन्दूपनिषद् और 16वें नंबर पर अवधूतोपनिषद् (पद्य) उल्लिखित है। डा. वेद प्रकाश उपाध्याय ने भी अल्लोपनिषद को प्रामाणिक उपनिषद् माना है। ‘देखिए: वैदिक साहित्य: एक विवेचन, प्रदीप प्रकाशन, पृ. 101, संस्करण 1989।)

12 टिप्‍पणियां:

safat alam taimi ने कहा…

बैनामी साहब
हम आपसे आदर और सम्मान के साथ अनुरोध करते हैं कि ज़रा क़ुरआन का अध्ययन करके देखें फिर पता चलेगा कि यह ग्रन्थ हमारा ही है मुसलमानों का नहीं। आज पूरी दुनिया क़ुरआन की ओर आ रही है क्यों ? इसलिए कि क़ुरआन सम्पूर्ण संसार के लिए अवतरित हुआ है।
आपने जितने भी संदेह हैं उन सब का उत्तर दिया जा चुका है। अपितु यह संदेह नहीं अज्ञानता का परिणाम है।

safat alam taimi ने कहा…

तुच्छ वीर्य से जन्म लेने वाला मानव सर्वशक्तिमान अल्लाह के सम्बन्ध में क्या कल्पना करेगा। उसे तो स्वयं पर झांक कर देख लेना चाहिए कि कभी क्या था

safat alam taimi ने कहा…

बेनामी साहब
हम आपके प्रश्नों का उत्तर उस समय देंगे जबकि आप हमारे क़ुरआन से सम्बन्धित लेखों को पढ़ लें कि क्या क़ुरआन मानव रचित है। ताकि उत्तर से सहमत हो सकें यदि आप सहमत होना चाहते हैं तो और यदि उद्देशय बस आपत्ति ही है तो सलाम.... क्योंकि अपने भाईयों से उलझना अच्छा नहीं।

safat alam taimi ने कहा…

मेरे भाई ! मैं बड़े ही आदर और सम्मान के साथ आपसे अनुरोध करता हूं कि आप एक बार क़ुरआन के सम्बन्ध में हमारे लेखों को पढ़ कर देखें फिर पता चलेगा कि क्या ऐसा सम्भव भी है कि कोई मानव क़ुरआन जैसा कोई ग्रन्थ बना सके। क़ुरआन तो आज तक चुनौति बना हुआ है पूरे संसार के लिए कि है कोई मानव जो क़ुरआन की शैली में एक श्लोक ही बना कर पैश कर दे (सूरः बक़रः आयत 23)

ali ने कहा…

benami tu kis school main padha hai tu kahta hai tu ne quran pada hai tu ne vaid aur bible padha hai. tu ne kuch nahi pada hai agar padha bhi to sayad samjha nahi chal aa main tughe batata hu quran ki kuch haqiqat quran ne 1400 sall pahle kaha halal meet khao to ab scince se bhi saabit ho gaya halal meet baqi meet se utam aur surkchit hota hai isliye ye ab america aur urop main sab se zayada bikta hai .chal dusra quran kahta hai 1400 saal pahle khattana tumhare liye afzal hai magar ab tumhare doctor bhi khattna karna seekh gaye kiyo. quran ne madhumakhi chintti makdi in sab ka jiwan virt quran ne pahle hi bata diya hai saath hi insaan ke body ki baat ho ya barsat ki ya akash patal chand suraj aur is akash ganga ki ho sab ke bare main sirf quran ne satik jankari dee hai aise aur bhi hazaro misaal hai quran main isi karan ajj america urop aur har jagah pade likhe bade bade scincetist islam kabool kar rahe hai ajj islam duniya main sab se teeze se badhne wala dharm hai rahi baat teri to tu to pagal lagta hai tu kahta hai hum ne sab padha hai magar tu ne quran ka pahla lawz bismilla ka mani hi nahi samjha to kya pada dil laga kar pad bismillah banda allah ke liye karta hai ne ke allah . ab tu mujhe bata tu ne vaid bhi pada hai kya padha tujhe kis ne tere baap ne ya iswar banaya tu sonch tujhe anser mil jaye ga. mujhe to sab se bada dokhebaz tu lag raha hai tu ne kaha tu ne sab padha hai padhta to issa nahi kahta tu apne aap ko apne maa baap ko saare samaj ko doka de raha hai.tu jahil hai magar .lambi lambi chood raha hai.

safat alam taimi ने कहा…

बेनामी साहब! इस्लाम सम्पूर्ण संसार के मानव के लिए एक उत्तम उपहार है। औऱ आप का धर्म भी इस्लाम ही है काश कि इसकी खोज कर के देखते।

safat alam taimi ने कहा…

बेनामी साहब ने दावा किया कि मैं ने क़ुरआन और हदीस पढ़ा है फिर ऐसी बेतुकी बातें कर रहे हैं क्या कोई अपने पिता को पहचानने के बाद भी उसका इनकार करेगा। मेरी समझ से नहीं.....

"Aks" ने कहा…

सफल जी आपने बेनामी की टिप्पणियों को हटा दिया हमें कैसे पता चले की उसने क्या लिखा था ..और रही बात गीता की तो जहा मोह+मद+अन्धकार को मोहम्मद बना दिया अपने हिसाब से अर्थ निकाल लिया संस्कृत के इतने ज्ञाता है तो १८ अध्याय और भी है सबके अर्थ निकाल|
गीता तो मुहम्मद साहब के आने से पहले थी और मुहम्मद ने अपने हिसाब से शब्दों को वहाँ से निकाल लिया और अपना धर्म बना दिया |मक्का में अभी भी बहुत से ऐसे है जिन्होंने मुस्लिम धर्म नहीं अपनाया जबकि वहाँ पैगम्बर खुद थे...आसा करता हूँ मेरी टिप्पणी हटायेंगे नहीं

बेनामी ने कहा…

Aapne likha hai ki Sanatan Dharam bhi ISLAM hi hai. Aap ne to saari study ki huai hai. But kya aap mujhe ye batayege ki Sanatan Dharam to Saari Ki saari Sanskrit me likhi hui hai Or Quran Arabic me hai. Iska Matlab to Ye hua na Ki saare ke saare ved jhoothe hai jo apni hi book me kishi or dharam ko prefer ker rahe hai. aap keh rahe ho ki Bhavishya Puran me Kalik Avtaar ke baare me likha hai but wo bhi sanskrit me hai. Me ye to maan sakta hu ki Quraan Allah ki likhi hui kitaab hai but ye nahi maan sakta ki baaki ke sabhi dharm jhoothe hai. Aap kehto ho ki islam hi sabse pehla dharm hai but vedo Or puraano me to kahi ye nahi kaha gaya ki islaam apnaao. rahi baat Mahabharat ki or Ramayan ki To us Time bhi Temple the It Means Raam Or Krishna Jhoothe The Murkh The wo Jo murti ki pooja karte the. Geeta me kaha gaya hai ki sach to hamesha sach hi rehta hai but uski Definition Place to place Or time to time badal jaati hai. Me ye Manta hu ki Islaam is duniya ka sabse aakhri Dharm hai or kaafi achha hai or regulation bhi bohot hi achhaa. me achhe kaamo me believe karta hu agar aap kuch achha karoge to hi aapko Jannat milegi agar nahi to kitini bhi Ibadat kar le or kitni bhi pooja kar le. kuch bhi nahi hoga. Agar aisa hota to kisi ki jaan bina wazah leke Ganga Naha le to Paap se choot jaaye ya Haj kar le ya God Ke saamne Confession kar le. But Aisa kuch Nahi hota. Bure kaam karoge to koi dharm aapko maaf nahi karega. me aapke Culture ka respect karta hu but kuch baate nahi maan sakta jaise aapka dharam sabse purana hai. Egypt Bohot hi purana hai Or waha ka science bhi bohot purana. Rahi baat Planet ki to Vedo me iske baare sab kuch bataya gaya hai. agar murti pooja galat hai to jo islam ko maante unke siwa world me kisi ko bhijannat nahi milegi sab jahannu me jaayenge. Is duniya me aastha se badhkar kuch bhi nahi chahe wo kisi bhi religion ya Culture ka ho. Plz replye Zaroor kare.

राज चौधरी ने कहा…

दुनियां में सबसे पूरण धर्म सनातन धर्म है वाकी सभी धर्म उसकी सखाये है/

बेनामी ने कहा…

chutiys bna rha h.. snatan dharm se pehle koi dharm. nahi tha

safat alam taimi ने कहा…

ए के एस जी, मुहम्मद जी कोई इस्लाम के संस्थापक नहीं बल्कि इस्लाम के अन्तिम संदेष्टा हैं, और इस्लाम उसी समय से है जिस समय से इस धरती पर मानव हैं।

मुहम्मद सल्ल. तो स्वयं लिखना पढना नहीं जानते थे, उनका सारा ज्ञान अल्लाह की ओर से था, अब आप ही विचार करें कि जो अपनी भाषा को लिखना पढ़ना न जानता हो वह वेदों को पढ़ कर अपना धर्म कैसे बनाएगा।

इस्लाम किसी भी गैरमुस्लिम को ज़बरदस्ती इस्लाम स्वीकार नहीं कराता कि इस्लामी देश में सारे मुसलमान ही रहेंगे।