शनिवार, 23 जुलाई 2011

हदीस और आधुनिक विज्ञान




आज से चौदह शाताब्दि पूर्व मुहम्मद सल्ल0 ने कुछ ऐसे तथ्य की ओर संकेत किया था जिनका समर्थन आज के आधुनिक युग में विज्ञान पूर्ण रूप में करता है। इस लेख में हम तीन उदाहरणों द्वारा इस विषय की व्याख्या करेंगे।

मक्खी के एक पैर मैं बीमारी, दूसरे में शिफा:

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: "यदि तुम में से किसी के पीने की वस्तुओं (पानी, दूध आदि) में मक्खी गिर पड़े तो उसे चाहिए कि उसे ड्रिंक में डुबकी दे, फिर उसे निकाल फेंके, क्योंकि उसके एक पैर मैं बीमारी है तो दूसरे में शिफा।"

डॉक्टर मोहम्मद मोहसिन खान इस बारे में लिखते हैं: "चिकित्सा ने यह सिद्ध किया है कि मक्खी अपने शरीर के साथ कुछ जीवाणु उठाए फिरती है, जैसा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने 1400 साल पहले बयान फ़रमाया जब इंसान आधुनिक चिकित्सा के बारे में बहुत कम जानते थे..... हाल अनुभव से पता चलता है कि एक मक्खी बीमारी (जीवाणु) के साथ साथ जीवाणु का इलाज भी उठाए फिरती है. आमतौर पर जब मक्खी किसी भोजन को छूती है तो वह उसे अपने जीवाणु से दूषित कर देती है इसलिए उसे पीने की चीज़ में डुबकी देनी चाहिए ताकि वे जीवाणु की शिफा भी इसमें शामिल हो जाए।

कुत्ता चाट जाए तो बर्तन को सात बार धोना क्यों मुहम्मद सल्ल0 के प्रवजनों में आता है कि जब कुत्ता बर्तन को चाट जाए तो उसे सात बार धोया जाए जिसमें पहली बार मिट्टी से। (सही मुस्लिम,अत्तहारः, बाब हुक्म वुलूग़िल कल्ब, हदीस न0 279)
इस हदीस की व्याख्या बलोगुल-मराम (अंग्रेजी) में इस प्रकार की गई है:

यह स्पष्ट है कि किसी चीज़ की केवल नापाकी से सफाई के लिए उसे सात बार धोना ज़रूरी नहीं, किसी चीज को सात बार धोने का रहस्य मात्र सफाई करने से भिन्न है। आज के चिकित्सा विशेषज्ञ कहते हैं कि कुत्ते की आंतों में जीवाणु और लगभग 4 मिमी लंबे कीड़े होते हैं जो उसके फज़ले के साथ बाहर होते हैं और उसके गुदा के आसपास बालों से चिमट जाते हैं, जब कुत्ता उस जगह को ज़बान से चाटते है तो ज़बान इन जीवाणुओं से दूषित हो जाती है, फिर कुत्ता अगर किसी बर्तन को चाटे या इंसान कुत्ते का चुम्बन ले जैसे यूरोपीय और अमेरिकी महिलाएं करती हैं तो जीवाणु कुत्ते से बर्तन या औरत के मुँह में स्थानांतरित हो जाते हैं और फिर वह मनुष्य के आमाशय में चले जाते हैं, यह जीवाणु आगे गतिशील रहते और रक्त कोशिकाओं में घुस कर कई घातक बीमारियों का कारण बनते हैं क्योंकि इन जीवाणुओं का निदान खुर्दबीनी टेस्टों के बिना संभव नहीं. इस्लाम ने एक आम आदेश के अंतर्गत कुत्ते के लुआब को अपवित्र ठहराया और निर्देश दिया कि जो बर्तन कुत्ते के लुआब से प्रदूषित हो जाए उसे सात बार साफ किया जाए और उनमें से एक बार मिट्टी के साथ धोया जाए। (बुलूगल-मराम (अंग्रेजी) दारुस्सलाम, पृष्ठ: 16 हाशिए: 1)

उंगलियों के पोरों पर कीटनाशक प्रोटीन:
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: "जब तुम में से कोई खाना खाए तो वह अपना हाथ न पोछें यहां तक ​​कि उसे (उंगलियां) चाट ले या चटाले" ( सही मुस्लिम, अल-अश्रिबःबाब इस्तिह्बाब लअक़िल असाबिअ, हदीस न0 2031)
खाने के बाद उंगलियां चाटने का आदेश पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने चौदह सदियाँ पहले दिया। इसमें क्या हिकमत कार फ़रमा है इसकी पुष्टि चिकित्सा वैज्ञानिक इस दौर में कर रहे हैं.

एक खबर देखें.

"जर्मनी के चिकित्सा विशेषज्ञों ने शोध के बाद यह निकाला है कि मनुष्य की उंगलियों के पोरों पर विशेष प्रकार के प्रोटीन उसे दस्त, उल्टी और हैज़े जैसी बीमारियों से बचाती है. विशेषज्ञों के अनुसार वह जीवाणु जिन्हें "ई कोलाई" कहते हैं, जब उंगलियों के पोरों पर आते हैं तो पोरों पर प्रोटीन स्वास्थ्य को हानी पहुंचाने वाले जीवाणु को समाप्त कर देती है. इस तरह यह जीवाणु मानव शरीर पर रहकर हानिकारक नहीं बनते। खासकर इंसान को पसीना आता है तो कीटनाशक प्रोटीन गतिशील हो जाती है. विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अगर यह प्रोटीन न होती तो बच्चों में हैज़े, दस्त और उल्टी की बीमारियां अधिक होती". (दैनिक नवाये वक़्त 30 जून 2005)

पश्चिमी लोग खाने के बाद उंगलियां चाटने के कार्य को घृणित करार देकर इस पर अक्षर पालन करते हैं, लेकिन अब विज्ञान इस बात की पुष्टि कर रही है कि यह तो बहुत स्वस्थ है क्योंकि उंगलियां मुंह के अंदर नहीं जातीं और यूं मुंह के लुआब से दूषित नहीं होतीं. तथा उंगलियों के पोरों पर प्रोटीन से हानिकारक जीवाणु भी मारे जाते हैं. इसके विपरीत चम्मच या काँटे से खाना खाएं तो वह बार बार मुंह के लुआब से दूषित होता रहता है और यह भी घृणित प्रक्रिया है, जब अल्लाह तआला ने उंगलियों के पोरों पर कीटनाशक प्रोटीन पैदा की है तो हाथ से खाना और खाने के बाद उंगलियां चाटना दोनों स्वस्थ के कारण है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उपरोक्त हदीस में इन्हीं दो बातों पर अमल की हिदायत की गई है, यानी (1) खाना दाएं हाथ से खाया जाए, (2) हाथ पोंछने से पहले उंगलियां चाट ली जाएं.दाहिने हाथ से खाने और उसके बाद उंगलियां चाटने के इस इस्लामी परंपरा बल्कि सुन्नत को अरबों ने अब तक जीवित रखा हुआ है जिसे अतीत में यूरोप वाले गैर स्वास्थ्य प्रक्रिया ठहराने रहे, मगर अब उन्हीं के चिकित्सा शोधकर्ताओं की जाँच कह रही है कि यह कभी हानिकारक नहीं बल्कि ठीक स्वस्थ और उपयोगी है।

3 टिप्‍पणियां:

Shah Nawaz ने कहा…

Behtreen Jaankari di aapne Safat bhai...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग इस ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो हमारा भी प्रयास सफल होगा!

बेनामी ने कहा…

yaar bada vigyan bhara hai quran mein.. ab to man ye karna hai ki lund katwa kar, chaar shadiyan kar ke roza rakhna shuru kar doon.. musalman ban jaoon aur uske baad haz kar ayoon..