मंगलवार, 4 मई 2010

इस्लामी बैंक में सारे इनसानों का हित है।

जिस समय पूरी दुनिया आर्थिक संकट से जूझ रही थी और उसका कोई समाधान देखाई नहीं दे रहा था उस समय कुछ गैर-मुस्लिम पश्चिमी अर्थशास्त्र विशेषज्ञयों नें यह परामर्श दिया था कि विश्व आर्थिक संकट से निकलने के लिए इस्लामी आर्थिक नियम को अपनाना अति आवश्यक है। यूरोप  की एक अर्थशास्त्र विशेषज्ञ महिला स्वाती ताजीना ने लिखा था " अमेरिका का आर्थिक संकट इस्लामी आर्थिक नियम के लिए शुभ अवसर है जो ब्याज से बिल्कुल खाली है। "

और पत्रिका तचालीज़ के सम्पादक ने लिखा था " यदि हमारे अर्थ व्यवस्था के विशेषज्ञों नें क़ुरआन की शिक्षाओं का सम्मान किया होता और उनके आधार पर आर्थिन नियम निर्धारित की होती तो हम इस संकट में ग्रस्त न होते "।

यह बात बिल्कुल सही है कि जब दुनिया का आर्थिक नियम ब्याज पर चलना शुरू हो जाता है तो उसकी तबाही यक़ीनी हो जाती है क्योंकि ब्याज मानव जीवन के लिए एडज़ के समान है जो उसकी देफाई क़ुव्वत को घुन लगा देता है और उसे संकट के गड्ढे में जा गिराता है।

यह संदेश हमें क़ुरआन ने आज से चौदह सौ वर्ष पहले स्पष्ट रूप में दे दिया था " अल्लाह ब्याज को मिटाता है और दान को बढ़ाता है।" (सूरः बक़रा आयत न0 276)

इसी परिणाम को देखते हुए 1970 की दहाई में प्राइवेट सेक्टर में विभिन्न इस्लामी बेंकों की स्थापना हुई। 1980 की दहाई में इरान, सूडान, पाकिस्तान और मलेशिया ने इस्लामी बैंककारी के नवीन नियम को अपनाया। इस समय जद्दा से जकारता तक 50 मुल्कों में 280 सूद फ्री बैंक चल रहे हैं। डेनमार्क, ब्रिटेन, लक्जमबर्ग, स्विट्जरलैंड उनमें एक है। ताजा स्थिति है लंदन का दक्षिणी हिस्सा इस्लामी बैंकों के केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। इस इलाके में बैंकों की संख्या पांच तक पहुंच गई है।

ब्रिटेन में कुल शरई बैंकों की तादाद बाईस है और लंदन स्टॉक एक्सचेंज में इस्लामी बैंकों की हिस्सेदारी दस लाख अरब डॉलर तक आ गई है। जो दुबई के बाद दूसरे नंबर पर है। 1975 में दुबई में पहली इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक की बुनियाद रखी गई थी। 1977 में मिस्र और सूडान में फैसल इस्लामिक बैंक के नाम से पहली बार दो प्राइवेट बैंक खोले गए थे। 2007 तक दुनियाभर में इस्लामी बैंकों का कारोबार 37 प्रतिशत की दर से बढ़कर 729 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। और उनकी आर्थिक स्थिति भी दूसरे बेंकों की तुलना में अच्छी है।

इस्लामी बैंकिंग नियम की सब से मूल विशेषता यह है कि यह ब्याज, धोकाधरी, सट्टेबाज़ी, भ्रष्टाचार से बिल्कुल पाक है। यह नियम किसी इनसान का बनाया हुआ नहीं अपितु अल्लाह का उतारा हुआ नियम है जिसमें फेर बदल की गुंजाइश नहीं और जिसमें सारे इनसानों का हित है।

8 टिप्‍पणियां:

sahespuriya ने कहा…

स्लामी बैंकिंग नियम की सब से मूल विशेषता यह है कि यह ब्याज, धोकाधरी, सट्टेबाज़ी, भ्रष्टाचार से बिल्कुल पाक है।

sahespuriya ने कहा…

isalamic banking is solution of recession.

safat alam taimi ने कहा…

sahespuriya ji!
बहुमूल्य टिपण्णी देने पर साधुवाद

safat alam taimi ने कहा…

हमारे देश में कुछ लोग इस्लाम के नाम से ही भागते हैं . पता नहीं क्या सोच है उनकी, यदि कहीं पर मानव का भला हो रहा है तो इसमें रोकावट डालने से क्या फ़ायदा ?

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

दुनिया मान रही है कि इस्लाम के सिवा हल कहीं नहीं है लेकिन शैतान टाइप लीडर्स लोगों को भरमाते हैं और जिनके दिल में टेढ़ है वोह उनके पीछे हो लेते हैं और हलक हो जाते हैं . इस्लाम अपनाओ और खुद को हलाकत से बचाओ .

PARAM ARYA ने कहा…

मेरा भी खाता खुलवा देना जी ।

talib د عا ؤ ں کا طا لب ने कहा…

मुहतरम मुहब्बी भाई,
अस्सलाम अल्लैकुम व्राह्मतुल्लाह वबराकाताहू !
मैं भी हमारी अंजुमन का एक अदना सा मेंबर हूँ.हाँ कुछ सबब हैं जिसके बायस मैं वहाँ फिलवक कुछ ताऊन दे पाने में क़ासिर हूँ. हाँ कमेन्ट करने की हत्तल इमकान कोशां रहता हूँ.

अंजुमन में ब्लॉग लिंक देने का रिवाज नहीं है.अच्छी बात है.
लेकिन बिरादरान !! आप लोग अपने ब्लॉग पर तो 'दीन-दुन्या' का लिंक बसद शौक़ दे सकते हैं.मैंने जितने लिंक मिल सके हैं देने की कोशिश की है.और हाँ कभी फुर्सत मिले तो वहाँ घूम भी आया करें, क्या ज़हमत होगी !! और वक़्त रहा तो चंद अलफ़ाज़ नवाज़ आयें, मैं फ़र्त -ए -मुसर्रत से झूम जाऊं !

उम्मीद की इस अदने सी गुज़ारिश को नज़र अंदाज़ नहीं किया जाएगा !

वस्सलाम

irshad ने कहा…

wo baat to pahale hi kaha gya hai kuraan paak me ki ek din puri duniya me islam ka uday hoga mai uska aasar dekh raha hu ab sare muslim birodhi desh bhi islamik bainking ruls folo karenge qki agar nahi karenge to muh ki khayenge, aur mai ek baat kahunga ki aage jakar jaise is samaye apni aarthik pareshani ko sudharne ke liye sare desh ko isllamic bainking ruls bha rahe hai, aaj to wo hamare islamic bainking uls apna rahe hai mai gairenti ke sath kah sakata hu ki kal sare desh islamic kanun bhi folo karenge q ki unke pass koi chara nahi rahega islamic kanum me nyay hai dur dur tak brastachari nahi hai aurato ko bhot ijjat deta hai islamic kanun ,jo hal aaj sare desh ke baink ka wahi hal kal ko sare non muslim samaj ka hoga