शुक्रवार, 1 जून 2012

सार्वजनिक स्थल पर नमाज़ पढ़ने वाले के प्रति प्रेंम क्यों ?

एक सज्जन ने फेसबुक पर लिखा थाः
कुछ हिंदुओं की सोच बड़ा अजीब होती है.अगर आप किसी पब्लिक प्लेस पर हनुमान चालीसा पढेंगे तब वह आपको हिकारत की नजर से देखेंगे.लेकिन अगर कोंई मुसलमान उनके बगल में चादर विछाकर नमाज पढ़ने लगेगा तब उसे बहुत इज्जत के साथ देखेंगे.

1.सब से पहली बात तो यह है कि यह जग़बात को भड़काने और दूसरों से दूर करने  वाली सोच है। क्या ही अच्छा होता कि हम प्रेम और परस्पर एकता की बात करते ।

 2. हम भारत के रहने वाले हैं, एक दूसरे को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, विषेश रूप में धार्मिक लोगों के साथ प्रेम का व्यवहार करते हैं, आज भी हमारे भारत की संस्कृति एक दूसरे को प्यार की दृष्टि से देखना सिखाती है।

3.जब मुसलमान सार्वजनिक स्थान पर नमाज़ पढ़ रहा होता है तो इसके द्वारा असल में वह यह संदेश दे रहा होता है कि हम शान्तिवादी हैं,प्रेम के दूत हैं , जब हम अपने पैदा करने वाले का अधिकार यहाँ पर भी पामाल नहीं कर सकते तो उसकी सृष्टि के अधिकार को कैसे पामाल कर सकते हैं। इस तरह ऐसे व्यक्ति पर आदमी का विश्वास बंध जाता है औऱ उस के अस्तित्व से किसी को कोई भय नहीं रहता।

3. ऐसे व्यक्ति  को इज़्ज़त की दृष्टि से देखना यह एक प्राकृतिक भावना है क्यों कि मुसलमान उसी के पैदा करने वाले की पूजा कर रहा होता है इस लिए उसके प्रति प्रेम और इज्ज़त स्वाभविक है।

4. एक मूल बात यह भी है कि मुसलमानों की नमाज़ों का समय निर्धारित होता है। वह अपनी नमाज़ को दूसरे समय के लिए टाल नहीं सकता कि नमाज़ का समय समाप्त हो जाएगा, इस लिए वह जहां भी रहता है सब से पहले अपने पैदा करने वाले के अधिकार को पूरा करता है।

5. अब रही मुर्ति-पूजा की बात तो हम मुसलमान होने के नाते  उसे बुरा भला नहीं कहते और ना ही मुर्तियों के प्रति बुरे शब्द का प्रयोग कर सकते हैं कि इस्लाम हमें इस से रोकता है परन्तु यह एक अप्राकृतिक नियम है कि श्रेष्ठ मानव अपने ही हाथ से बनाई गई किसी तुच्छ मूर्ति के सामने माथा टेके, इसी लिए उसके प्रति एक आम आदमी के मन में प्रेम की भावना नहीं पैदा हो सकती। लेकिन एक मुसलमान उसे भी प्रेम ही की दृष्टि से देखता है कि कम से कम यह अपने ईश्वर का नाम तो ले रहा है यधपि उसे पहचानता नहीं है।  
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अंत में हम धन्यवाद प्रकट करते हैं डा0 अनवर जमाल साहब को कि उन्होंने इसे नवभारत टाइम्स पर पोस्ट किया जिस पर लम्बी टिप्पणियाँ की गईं। 
  

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