मंगलवार, 18 नवंबर 2008

काफिर कह कर गाली क्यों ?

मुसलमान ग़ैर मुस्लिमों को काफिर कह कर गाली क्यों देते हैं ?
उत्तर : काफिर अरबी भाषा का शब्द है जो कुफ्र से निकला है इस शब्द का अर्थ है छुपाना, इनकार करना और रद्द करना अर्थात ऐसा व्यक्ति जो इस्लामी आस्था का इनकार करे अथवा उसे रद्द कर दे उसे इस्लाम में काफिर कहा जाता है। दूसरे शब्दों में जो व्यक्ति इस्लाम के ईश्वरीय कल्पना का इनकार कर दे वह काफिर कहलाएगा। यदि हमें इस शब्द का अंग्रेज़ी में अनुवाद करना होगा तो कहूंगा Non Muslim अर्थात जो व्यक्ति इस्लाम को स्वीकार नहीं करता वह Non Muslim है और अरबी में कहा जाएगा कि वह काफिर है-
अतः यदि आप यह मुतालबा करते हैं कि Non Muslim को काफिर न कहा जाए तो यह किस प्रकार सम्भव होगा ? यदि कोई गैर मुस्लिम यह मुतालबा करे कि मुझे काफिर न कहा जाए अर्थात ग़ैर मुस्लिम न कहा जाए तो मैं यही कह सकता हूँ कि श्रीमान! आप इस्लाम स्वीकार कर लें तो स्वयं आपको ग़ैर-मुस्लिम अर्थात काफिर कहना छोड़ दूंगा क्योंकि काफिर और ग़ैर-मुस्लिम में कोई अतंर तो है नहीं, यह तो सीधा सीधा शब्द का अरबी अनुवाद Non Muslim है और बस। ( डा0 ज़ाकीर नाइक )

6 टिप्‍पणियां:

आदर्श राठौर ने कहा…

मेर भाई
किसी को भी गैर-मुस्लिम कहाने में आपत्ति नहीं है। लेकिन फर्क वहां पड़ता है जिसमें इस्लाम में काफिरों के खिलाफ़ किस तरह का व्यवहार करने की शिक्षा दी गई है। आप तो अपने धर्म के ज्ञाता हैं, तो कृपया ये बताएं कि कुरआन शरीफ़ या अन्य हदीसों में काफिरों के साथ किस तरह का सुलूक करने को कहा गया है?
और जहां तक डॉ. साहब का प्रश्न है, भले ही वह स्कॉलर हों लेकिन कई बार कुतर्क करने से भी बाज़ नहीं आते। यही कारण है कि वाराणसी के दौरे पर आने पर वहीं के मुस्लिम भाइयों ने विरोध कर उन्हें आने नहीं दिया। आपत्तिजनक टिप्पणियां की थी उन्होंने जो जनता को रास नहीं आई
और हां सेटिंग्स में जाकर वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें

आदर्श राठौर ने कहा…

लिखते अच्छा हैं,
जारी रखिए,
संपर्क में रहें।
मेरे ब्लॉग में भी आएं

आदर्श राठौर ने कहा…

भाई् आप अपने ब्लॉग को चिट्ठाजगता या दूसरे ब्लॉग एग्रीगेटर में पंजीकृत कराएं।
इससे आपके ब्लॉग में पाठक ज्यादा आएंगे
मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया।

abhishek kumar ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
abhishek kumar ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
abhishek kumar ने कहा…

Abhishek
Mujhe waise dharm ke baare me bhut jyada knowlge nhi hai......lekin jb maine kalki puran ke baare me internet pe search kiya to mujhe kai saare blog esse mile jisme kalki bhagwan aur muhamad saheb ke baare me same statment mile...mujhe khusi bhi hui ki kalki bhagwan aur pagamber saheb ek hai...lekin thoda dukh bhi hua ki hum sabhi log aaj bhi hindu ya musalman ke baat pe aaj bhi ladte..ek dusare ko bura bolte hai......kya kisi ne socha hai ki jb hum ek dusare ko bura bolte hai to us god ko kitna bura lagta hai....finally hum sbhi ek hi god ke santan hai....is baat me kitni sacchai hai main ya koi nhi jatna..lekin ek baat jarur janta hu....ki GOD IS ONE AND ONLY ONE.....AND RESPECT ALL THE DHARM...