सोमवार, 19 अक्तूबर 2009

प्रवचन 2

श्री अब्दुल्लाह पुत्र अब्बास (रज़ि0) का बयान है कि एक दिन मैं अल्लाह के अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्ल0 के पीछे सवारी पर बैठा था कि आपने फऱमायाः

«ऐ बेटे! मैं तुम्हें कुछ बातें सिखाता हूं: अल्लाह को याद रख, अल्लाह तेरी रक्षा करेगा। अल्लाह को याद रख अल्लाह को अपने सामने पाएगा। जब तुझे कुछ सवाल करना हो, तो मात्र अल्लाह ही से सवाल कर, और जब तुझे सहायता की आवश्यकता हो, तो मात्र अल्लाह ही से सहायता माँग। और अच्छी तहर जान ले कि यदि सारा संसार इस बात पर एकत्र हो जाए कि तुझे किसी चीज़ से लाभ पहुंचा सके तो वह कदापि नहीं पहुंचा सकते, हाँ मगर उस चीज़ के साथ जो अल्लाह ने तेरे भाग्य में लिख दी है। और यदि प्रत्येक जगत इस बात पर एकत्र हो जाए कि वह तुझे किसी चीज़ से हानि पहुंचा सके तो वह कदापि नहीं पहुंचा सकते परन्तु इस चीज़ के द्वारा जो अल्लाह ने तेरे भाग्य में लिख दी है। क़लम उठा लिए गए हैं। और सहीफें खुश्क हो चुके हैं।» (तिर्मिज़ी)

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

उपदेश बहुत बढ़िया रहा।
मुबारकवाद।