मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

पर्यावरण प्रदूषण और इस्लाम


 Global Warming आज की सब से बड़ी समस्या है। रसूल सल्ल. ने इस्लाम की रोशनी में धरती से अमली तौर पर हर प्रकार की गंदगी को दूर करने की ताकीद की जिस से पर्यावरण भंग हो सकता हो. आप (सल्ल.) ने पवित्रता और सफाई के लिए लोगों की समझ को जागरूक किया। आप सल्ल. ने रास्ते और साए में शौचालय करने वालों पर लानत फरमाई। आप सल्ल. ने पाकी सफ़ाई को ईमान का हिस्सा बताया. आप सल्ल. ने जल के दुर्उपयोग को नापसंद किया. यहां तक ​​कि पैगम्बर सल्ल. का फरमान है कि कोई नहर के किनारे पर बैठा है फिर भी पानी का जरूरत से अधिक उपयोग न करे. अल्लाह के रसूल मुहम्मद सल्ल. ने ठहरे हुए पानी में पेशाब करने से मना किया। मुहम्मद सल्ल. ने ऐसे ईंधन के उपयोग से मना फ़रमाया जिसका धुआं पड़ोसी के घर में आए।
रसूल सल्ल. ने पेड़ पौधे लगाने वालों को प्रोत्साहित किया. पर्यावरण सफाई और सुरक्षा के लिए क्रांतिकारी कदम भी उठाए। आपने फ़रमाया:'' अगर क़यामत का समय आ जाए और तुम में से किसी के हाथ में खुजूर के पौधे हों क़ियामत के बरपा होने से पहले वह उसे लगा सकता हो तो उसे जरूर लगा देना चाहिए।''  बल्कि आपने स्वयं अपने हाथों से पेड़ लगाए।

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
साझा करने के लिए आभार!